हमारे बारे में
परंपरा, अनुशासन और ज्ञान के मूल्यों पर आधारित एक संस्कृत महाविद्यालय।
2026
स्थापना वर्ष
महाविद्यालय की स्थापना
आचार्य रमाशंकर संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना वर्ष 2026 में संस्कृत भाषा एवं भारतीय शास्त्रीय परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के पावन उद्देश्य से की गई। महाविद्यालय का नाम आचार्य रमाशंकर जी की स्मृति में रखा गया है, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन संस्कृत भाषा एवं भारतीय संस्कृति के संरक्षण हेतु समर्पित किया।
संस्थान का मानना है कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं अपितु भारतीय सभ्यता की आत्मा है। इसी भावना के साथ हम विद्यार्थियों को साहित्य एवं व्याकरण के माध्यम से शास्त्रीय ज्ञान की गहराई से परिचित कराते हैं।
हमारी दृष्टि (Vision)
संस्कृत शिक्षा के माध्यम से भारतीय ज्ञान-परंपरा को सशक्त करना तथा विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों एवं सांस्कृतिक चेतना का विकास करना।
हमारा लक्ष्य (Mission)
गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, अनुशासित वातावरण एवं समर्पित आचार्यों के माध्यम से हर विद्यार्थी को साहित्य एवं व्याकरण में निपुण बनाना।
हमारा नेतृत्व
अवनीश चौबे
निदेशक (Director)
शैक्षणिक योग्यता: एम.ए. (M.A.)
श्री अवनीश चौबे जी संस्कृत शिक्षा के प्रति गहन निष्ठा रखते हैं। उनके नेतृत्व में महाविद्यालय निरंतर उत्कृष्टता की दिशा में अग्रसर है। उनका मानना है कि संस्कृत शिक्षा विद्यार्थियों के चरित्र-निर्माण एवं सांस्कृतिक जागरूकता में अत्यंत सहायक है।
मंशा देवी
प्राचार्य (Principal)
शैक्षणिक योग्यता: एम.ए., बी.एड. (M.A., B.Ed.)
श्रीमती मंशा देवी जी के कुशल मार्गदर्शन में महाविद्यालय का शैक्षणिक संचालन सुव्यवस्थित रूप से होता है। वे विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास एवं अनुशासित शिक्षण-वातावरण सुनिश्चित करने हेतु सदैव तत्पर रहती हैं।
हमारी सुविधाएँ
समृद्ध पुस्तकालय
शास्त्रीय एवं आधुनिक ग्रंथों का विशाल संग्रह।
अनुभवी आचार्य
योग्य एवं समर्पित शिक्षकों द्वारा मार्गदर्शन।
अनुशासित परिसर
शांत एवं शैक्षणिक अनुकूल वातावरण।
सांस्कृतिक गतिविधियाँ
वाद-विवाद, श्लोकोच्चारण एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम।